Tirupati Stampede 2025: तिरुपति भगदड़ का जिम्मेदार कौन?

तिरुपति भगदड़ (Tirupati Stampede) का जिम्मेदार कौन ? ये सवाल अभी सबके मन में आ रहा है। इसी बात के बारे हम आप को आज बतलायेंगे।

भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में स्थित तिरुपति मंदिर शहर में एक दुखद हादसे ने छह लोगों की जान ले ली और कई अन्य घायल हो गए। यह घटना तब हुई जब भक्त मंदिर के अंदर प्रवेश के लिए टोकन लेने के लिए जमा हुए थे। इस भगदड़ के पीछे खराब प्रबंधन, असंगत समन्वय, और सुरक्षा में खामियों को मुख्य कारण बताया जा रहा है।

Tirupati Stampede

तिरुपति भगदड़ (Tirupati Stampede) का जिम्मेदार कौन?

10 जनवरी से शुरू होने वाले दस दिवसीय उत्सव के लिए भक्तों को टोकन दिए जा रहे थे। बुधवार रात, MGM हाई स्कूल के पास बनाए गए टोकन वितरण केंद्र पर भीड़ अनियंत्रित हो गई। लगभग 4,000-5,000 लोग टोकन लेने पहुंचे, और भीड़ के दबाव से रात 8:50 बजे गेट टूट गए, जिससे भगदड़ मच गई। कुछ लोग गिर गए और अन्य उनके ऊपर से गुजर गए।

सुरक्षा कर्मियों और स्थानीय निवासियों ने घायल व्यक्तियों की मदद की, लेकिन पर्याप्त प्रशिक्षण की कमी के कारण उनकी सहायता प्रभावी नहीं रही।

प्रबंधन की खामियां

बैरिकेड की कमी: वितरण केंद्रों पर बैरिकेड्स नहीं थे।

सुरक्षा की अनदेखी: अधिकारियों को भीड़ बढ़ने की जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

समन्वय की कमी: पुलिस और TTD (तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम) के बीच समन्वय की कमी रही।

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सरकार और TTD की प्रतिक्रिया

आंध्र प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिवारों को ₹25 लाख मुआवजा देने की घोषणा की।

TTD और राज्य सरकार को प्रबंधन की खामियों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने इस घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही।

भारत में भगदड़ की घटनाएं

भारत में धार्मिक आयोजनों के दौरान भगदड़ आम हो गई हैं। 1996 से 2022 के बीच 3,935 भगदड़ की घटनाएं दर्ज की गईं।

  • 2022: वैष्णो देवी मंदिर में 12 लोगों की मौत।
  • 2016: केरल में 112 लोग मारे गए।
  • 2013: कुंभ मेले में 36 लोगों की मौत।

मुख्य सवाल

  • क्यों भारत में भीड़ सुरक्षा प्राथमिकता नहीं है?
  • आयोजकों को पर्याप्त प्रवेश और निकास बिंदु, आपातकालीन तैयारी, और भीड़ प्रबंधन जैसे उपाय सुनिश्चित क्यों नहीं किए जाते?
  • क्या धार्मिक स्थलों और आयोजनों में सुरक्षा उपायों को अनिवार्य बनाने का समय आ गया है?

यह हादसा प्रशासनिक खामियों और सार्वजनिक सुरक्षा में लापरवाही का एक और उदाहरण है। अब वक्त आ गया है कि भीड़ प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए ताकि इस तरह की त्रासदी दोबारा न हो।

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